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How to cultivate Capsicum?

How to cultivate Capsicum: शिमला मिर्च, मिर्च की एक प्रजाति है जिसका प्रयोग भोजन में सब्जी की तरह किया जाता है ǀ अंग्रेजी में इसे capsicum कहते है ǀ मूलतः यह सब्जी दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप की है जहाँ ऐसे साक्ष्य मिलते है की इसकी खेती 3000 सालों से की जा रही है ǀ


Published: February 4th, 2021


How to cultivate Capsicum?

शिमला मिर्च, मिर्च की एक प्रजाति है जिसका प्रयोग भोजन में सब्जी की तरह किया जाता है ǀ अंग्रेजी में इसे capsicum कहते है ǀ मूलतः यह सब्जी दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप की है जहाँ ऐसे साक्ष्य मिलते है की इसकी खेती 3000 सालों से की जा रही है ǀ इसे ग्रीन पेपर, बेल पेपर, आदि विभिन्न नामों से जाना जाता है ǀ इसके फल गुदादार, घंटी नुमा होते है ǀ इनमे तीखापन नही के बराबर पाया जाता है, इनमे विटामिन ए तथा सी की मात्रा अधिक होती हैǀ यदि किसान इसकी खेती उन्नत एवं वैज्ञानिक तरीके से तो इसका अधिक उत्पादन एवं आय प्राप्त कर सकता है ǀ

सामान्य किस्में : कैलिफोर्निया वंडर, यलो वंडर, किंग आफ नार्थ, बुलनोज, अर्का मोहिनी, अर्का गौरव, अर्का बसंत व पूसा दीप्ति (संकर )
संकर किस्में : इंद्रा, भारत, ग्रीन गोल्ड, सोलन हाइब्रिड 1, सोलन हाइब्रिड 2, सोलन भरपूर आदि ǀ

जलवायु : गर्म मौसम की फसल है ǀ इसलिए मैदानी क्षेत्रों में वर्षा व गर्मी के मौसम में खेती की जाती है ǀ बीज अंकुरण के लिए 16-20 डिग्री से., पौधे के बढवार के लिए 21-27 डिग्री से. तथा फल विकास व परिपक्वता के 30 डिग्री से. तापमान उपयुक्त है ǀ तापमान अधिक होने से पौधे से फूल झड़ने लगते है ǀ

भूमि : शिमला मिर्च की खेती के लिए बलुई दोमट मिटटी, जिसमे जीवाश्म की मात्र अधिक हो , उपयुक्त होती है ǀ बुवाई के पूर्व भूमि को 3-4 बार खुदाई करके मिट्टी को तैयार कर लिया जाता है ǀ भूमि का पी.एच मान 6.5 से 8 वाली भूमि उपयुक्त होती है ǀ

बीज की मात्रा : सामान्य उन्नत किस्मों के लिए 500 से 600 ग्राम और संकर किस्मों के लिए 200 से 250 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर उपयुक्त रहता है ǀ

बुवाई : इसके लिए बीज बुवाई जुलाई से अगस्त में करनी चाहिए एवं पर्वतीय क्षेत्रों में फरवरी से मार्च तक बीज बुवाई करनी चाहिए ǀ
पौधे की तैयारी के लिए पहले गोबर व अन्य खाद पौधे वाले स्थान पर मिट्टी में मिलाना चाहिए, इसके बाद जमीन की सतह से 10 से 15 सेमी. क्यारी बना लें ताकि उसमे पानी न ठहरे ǀ अब लाइन से लाइन की दूरी 5 से 7 सेमी. और 2.5 से 3 सेमी. की घरे पर बीज की बुवाई कर देनी चाहिए
सिंचाई प्रबंधन : पौधों के रोपने के फ़ौरन बाद ही खेत की सिंचाई कर देनी चाहिए, शिमला मिर्च की खेती में कम सिंचाई या फिर जरूरत से ज्यादा सिंचाई कर देने से उसके फलों को हानि पहुँच सकती है ǀ गर्मी में 1 सप्ताह और ठण्ड में 15 दिनों के मध्यांतर पर खेत की सिंचाई कर देनी चाहिए यदि बरसात में खेत में पानी जमने लगे तो पानी निकलने का जल्द से ल्ज्द प्रबंध करे ǀ

निराई–गुड़ाई : 30 से 35 दिनों में शिमला मिर्च के पौधे रोपाई योग्य हो जाते है ǀ रोपाई के समय रोप की लम्बाई लगभग 16 से 20 सेमी. एवं 4 से 6 पत्तियां होनी चाहिए ǀ पौधों की रोपाई अच्छी तरह से उठी हुई तैयार क्यारियां में करनी चाहिए ǀ क्यारियों की चौड़ाई सामन्यतः 90 सेमी. रखनी चाहिए ǀ पौधों की रोपाई ड्रिप लाइन बिछाने के बाद 45 सेमी. की दूरी पर करनी चाहिए ǀ

खाद एवं उर्वरक : खेत की तैयारी के समय 25-30 टन गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट डालना चाहिए ǀ आधार खाद के रूप में रोपाई के समय 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 80 कि.ग्रा.सल्फर
व 80 कि.ग्रा. पोटाश डाले तथा रोपाई के 30-35 दिन बाद खड़ी फसल में 50 कि.ग्रा. नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें 

खरपतवार नियंत्रण : शिमला मिर्च की 2 से 3 बार निराई व गुड़ाई करनी चाहिए तथा रासायनिक खरपतवार नियंत्रण हेतु रोपाई से पहले 1.2 लिटर पेंडामेथेलिन या स्टाम्प के घोल का प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करें ǀ

वृद्धि नियंत्रक : शिमला मिर्च की अच्छी उपज के लिए 30-40 दिनों के अंदर पौधों में मिटटी चढ़ाना आवश्यक है तथा उपज बढाने के लिए ट्राईकोंटानॉल 1.25 पी.पी.एम (1.25 मिलीग्राम/लिटर पानी) रोपाई की 20 दिन की अवस्था से 20 दिन के अंतराल पर 3 से 4 बार छिडकाव करना चाहिए तथा इसी प्रकार एन.ए.ए.10पी.पी.एम (10 मिलीग्राम/लिटर पानी) का 60 वें दिन एवं 80 वे दिन छिडकाव करना चाहिए ǀ

पौधों को सहारा देना : शिमला मिर्च में पौधों को प्लास्टिक या जूट की सुतली रोप से बांधकर उपर की ओर बढ़ने दिया जाना चाहिए जिससे फल गिरे भी नही एवं फलों का आकर भी अच्छा हो ǀ पौधों को सहारा देने से फल मिट्टी के संपर्क में नही आते जिससे फल सड़ने की समस्या नही होती है ǀ

रोग एवं कीट नियंत्रक : शिमला मिर्च में लगने वाले कीटों के नाम कुछ इस प्रकार है –

 माहो
 थ्रिप्स
 सफ़ेद मक्खी
 मकड़ी

उपर दिए गए सभी कीटों से बचने के लिए लगभग 1 लिटर पानी में डायमेंथोएट या मेलाथियान का घोल तैयार कर हर 15 दिन के अंतर पर 2 बार छिडकाव करे ǀ
आम रोग : इसमें लगने वाले आम रोग –
 आद्रगलन
 भभूतिया रोग
 उकटा
 पर्णकुचन
 श्यामवर्ण

आद्रगालन रोग : यह रोग नर्सरी स्टेज में ही लगता है इससे बचने के लिए बुवाई के समय बीजो को treated किया जाना चाहिए ǀ

भभूतिया रोग : यह रोग सामन्यतः गर्मी में लगता है, इस रोग से पत्तियों पर सफ़ेद चूर्ण जैसे दाग पड़ जाते है उसके बाद पत्तियां पीली होकर सूखने लगती है ǀ इससे बचने के लिए 0.2% के घोल को हर 15 दिन के अंदर कम से कम 3 बार छिडकाव करना होगा ǀ

जीवाणु उकठा : इस रोग से फसल मुरझाकर सुख\ने लगती है, इस रोग से बचने के लिए रोपाई के पूर्व लगभग 15 कि.ग्रा. ब्लीचिंग पाउडर को प्रति हेक्टेयेर की दर से भूमि में मिला देना चाहिए ǀ

पर्ण कुंचन : इस रोग के प्रकोप से पत्ते सिकुड़ के छोटे हो जाते है तथा पत्ते हरे रंग से भूरे रंग के हो जाते है ǀ इस रोग से बचने के लिए बुवाई के पूर्व लगभग 10 ग्राम कार्बोफयूरान 3g को प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से भूमि में मिला दे ǀ

श्यामवर्ण : इस रोग से पत्तियों पर काले धब्बे होने लगते है और फिर धीरे-धीरे इसकी शाखाएं भी सूखने लगती है जिसके कारण फल भी सूखने लगते है ǀ अधिक आद्रता इस रोग को फ़ैलाने में सहायक होती है, इस रोग से बचने के लिए मेन्कोजेब, डायफोल्टान, या ब्लाईटॉक्स का 0.2% सांद्रता का घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल में 2 बार छिडकाव करें ǀ
फलों की तुड़ाई एवं उपज : शिमला मिर्च की तुड़ाई पौधा रोपण के 65-70 दिन बाद प्रारंभ हो जाता है जोकि 90 से 120 दिन तक चलता है ǀ नियमित रूप से तुड़ाई का कार्य करना चाहिए ǀ
उन्नतशील किस्मों में 100-120 क्विंटल एवं संकर किस्मों में 200-250 क्विंटल/हेक्टेयेर उपज मिलती है ǀ

शिमला मिर्च के फायदे :-

• शरीर का मेटाबालिज्म बढ़ाने में मददगार, जोकि वजन घटाने में कारगर है इतना ही नही कोलेस्ट्राल के स्तर को रोकने में मदद करता है ǀ
• रोजाना इसका सेवन करने से कैंसर होने की सम्भावना पूरी तरह ख़त्म हो जाती है ǀ
• दर्द से राहत मिलती है ǀ
• इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार ǀ

शिमला मिर्च के नुकसान :-

• एलर्जी होने पर इसका सेवन न करें ǀ
• शिमला मिर्च का इस्तेमाल कभी कटी हुई त्वचा पर न करें ǀ
• गर्भवती महिला या फिर अपने नवजात बच्चे को स्तनपान करवाती है तो इसका ज्यादा सेवन करना खतरनाक हो सकता है ǀ
• इसका ज्यादा सेवन करने से ब्लड प्रेशर की भी समस्या हो सकती है ǀ

बाजार : शिमला मिर्च की उपज को आसानी से लोकल मंडी या फिर मुख्य मंडी में बेचा जा सकता है, इसके आलावा मेट्रो सिटी में भी अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है ǀ बाज़ार में अधिकांशतः शिमला मिर्च 40 से 120 रु. प्रति किलोग्राम तक बिकती है ǀ अगर व्यवसायक के रूप में इसकी खेती की है तो इसे सीधे सब्जी मंडी में भी बेचा जा सकता है, जहाँ 30 रु से 60 रु प्रति किग्रा तक का भाव मिल सकता है ǀ
अगर आप के पास एक एकड़ भूमि है तो आप उन्नत खेती करके एक वर्ष में 3 से 3.50 लाख रुपये तक कम सकते है ǀ अगर मान भी लिया जाये की पहले साल उतना लाभ नही हुआ तो कम से कम आप 2 से 2.50 लाख तक तो कम ही सकते है और दूसरे वर्ष कम से कम 4 से 5 लाख आसानी से शिमला मिर्च की खेती करते हुए कम सकते है ǀ

सौजन्य से-अमन सिंह

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