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What is drip irrigation? And its benefits

Drip irrigation is the most efficient water and nutrient delivery system for growing crops. ड्रिप सिंचाई यह एक विशेष प्रकार की विधि होती है जिसमें इस विधि के द्वारा पानी और खाद को कम मात्रा में पानी में इस्तेमाल किया जाता है।


Published: February 4th, 2021


What is drip irrigation? And its benefits

1 – ड्रिप इरिगेशन (ड्रिप सिंचाई) क्या है? (What is drip irrigation)

ड्रिप सिंचाई यह एक विशेष प्रकार की विधि होती है जिसमें इस विधि के द्वारा पानी और खाद को कम मात्रा में पानी में इस्तेमाल किया जाता है। इस विधि में धीरे धीरे कम मात्रा में बूंद बूंद कर के डाला जाता है और इस विधि को करने के लिए कुछ उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है जैसे मीटर जो की ड्रिप सिंचाई में पानी की रफ्तार को इंगित करता है। पंप, फ़िल्टर यूनिट, फर्टिग्रेशन यूनिट, प्रेशर गेज आदि चीजों की जरूरत पड़ती है। ये एक ऐसी विधि है, जिसमें पानी बूंद बूंद या थोड़ी थोड़ी मात्रा में पौधों के जड़ तक पहुंचाया जाता है जिससे पौधों की जड़ धीरे-धीरे पानी सोकते है। इस विधि में कम पानी और कम खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे पेड़ की जड़ों में आवश्यकतानुसार पानी जड़ तक पहुंचाया जाता है।

इस विधि में पानी की बचत भी हो जाती है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से कृषक पानी और श्रम की बचत और उर्वरक उपयोग दक्षता में सुधार कर सकता हैं।

ड्रिप इरिगेशन कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों के लिए एक बहुत अच्छी तकनीक है। आज के समय में पानी की कमी से हर देश, राज्य इस स्थिति से जूझ रहे हैं, इसलिए ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए इस प्रक्रिया को बहुत अच्छा माना जाता है। ऐसे में ड्रिप सिंचाई को करते समय कुछ बातों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जैसे- मिट्टी, पानी, फसल, भूमि, कृषि, जलवायु, आदि। यह एक सफल प्रकार की प्रक्रिया होती है।

ड्रिप इरिगेशन

2- ड्रिप इरिगेशन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और उनका कार्य? (Instruments and thair function used in drip irrigation)

 

पंप-  पानी की आपूर्ति करता है

पाइपलाइन- मुख्य रूप से लेटरलेस में पानी की सप्लाई करती हैं।

मीटर- जो कि ड्रिप सिंचाई में पानी की  रफतार को इंगित करता हैं।

फिल्टर यूनिट- गंदे पानी को छानने में सहायता करता है और  ये बालू फ़िल्टर भी होता हैं इसमें  पानी को छान कर बालू को अलग किया जाता हैं।

फर्टिजेशन यूनिट- सिंचाई करने पर   पानी में खाद मिलाने की कार्य  व्यवस्था करता है।

प्रेशर गेज़- ये पानी के प्रेशर को इंगित करता है।

3- ड्रिप इरिगेशन के फायदे (Benifits of drip irrigation)

 

1- इस प्रक्रिया के कारण सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत होती हैं।

2- दूसरी सिंचाई विधि से ये विधि ज़्यादा बेहतर होती है।

3- इस विधि के द्वारा खेत में एक सामान मिट्टी को नमी प्राप्त होती है।

4- ड्रिप व्यवस्था के कारण सिंचाई में अधिक सामान्य मिट्टी व खाद की व्यवस्था होती है।

5- इस व्यवस्था के कारण बिना किसी परेशानी से कम मात्रा में पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

6- इस व्यवस्था से पूरे खेत में पानी एक सामान मात्रा में डाला जाता है।

7- इस व्यवस्था को देखते हुए दूसरी सिंचाई के तरीके की तुलना में मानव श्रम का कम उपयोग होता है।

4- ड्रिप इरिगेशन के नुक़सान (Disadvantage of drip irrigration)

 

1- ओवरहेड व्यवस्था के मुकाबले ड्रिप व्यवस्था का खर्च थोड़ा ज़्यादा हो सकता है।

2- ये व्यवस्था छिड़काव व्यवस्था की तरह एक तरह नियंत्रण में इस ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं हो सकता।

3- समय समय पर इसकी देखरेख करते रहना चाहिए। इस व्यवस्था को ज़्यादा समय तक चलाने के लिए समय समय पर पूरे ट्यूब में पीवीसी पाइप को बदलना की ज़रूरत पड़ती हैं।

4- इस व्यवस्था में समय समय पर सही तरीके से साफ सफाई करने की अधिक आवश्यकता पड़ती है।

5- सिंचाई की व्यवस्था को देखते हुए ड्रिप ट्यूब व्यवस्था की कम उम्र होती है, क्यूंकि ये सूरज की किरणों की वजह से जल्दी खराब हो जाती है।

5- ड्रिप इरिगेशन पर होने वाले खर्च ( Expenseson on drip irrigation)

 

ड्रिप व्यवस्था पर होने वाला खर्च ये फसल को देखते हुए किया जाता है। इस व्यवस्था में ड्रिप इरिगेशन व्यवस्था के प्रति इकाई खर्च फसल के प्रकार जैसे कि एक वर्ष की फसल या बागबानी फसलों के पौधों के बीच दूरी और पानी के स्रोत की जगह पर सब निर्भर करता है। यह खर्चा हर राज्य में अलग अलग होता है। भारत में ऐसे बहुत सारे राज्य हैं, जहां इस व्यवस्था के लिए अधिक खर्च किया जाता हैं।

इस प्रकार राज्यों के क्षेत्र में सिंचाई के तहत उन्हें अनुमानित लागत पर खर्च किया जाता हैं।

6- ड्रिप इरिगेशन के उपकरण की निरन्तर देखभाल (Continuous care of drip irrigation)

 

1- रोज़ पम्प को शुरु करने के बाद उपकरण के प्रेशर को कंट्रोल रूप से एक सामान होने पर सैंड फिल्टर की बैक वॉशिंग करना चाहिए और साफ सफाई के बाद हर 4, 5 घंटे या पानी के होने के अनुसार समय समय पर इसकी सफाई करना चाहिए।

2- खेलो में इस व्यवस्था को सही ढंग से और ज़्यादा समय तक चलाने के लिए इसकी देखरेख करे तथा कहीं भी डैमेज या लीकेज होने पर इसे तुरन्त ठीक करवाए। पाइप के ना मुड़ने का अधिक ध्यान दें।

3- ड्रिप इरिगेशन लगाने से पहले उसकी सही जगह सुनिश्चित कर लें जिससे इसे लगवाने के बाद बाद में कोई बाधा ना आए।

4- फ़िल्टर की सफाई होने के बाद हेडर असेम्बली के बाईपास की मदद से दबाव को नियंत्रित करना तथा इसको कार्य के अनुसार इस पर चलने वाले उपकरणों से सहायता से पानी पूरी तरह से हर जगह एक ही मात्रा में जाना।….

7- ड्रिप इरिगेशन पर सब्सिडी (Drip irrigation subsidy)

 

भारत में ड्रिप व्यवस्था में सबसिडी की व्यवस्था राज्य सरकार की योजना अनुसार उपलब्ध है। किसान को उनकी ज़मीन की मात्रा के अनुसार ये सब्सिडी दी जाती है। इस सब्सिडी की योजना का लाभ उठाने के लिए कृषि को अपने क्षेत्र के कृषि विभाग में जाकर वहां के कृषि अधिकारी से सम्पर्क करना चाहिए और इस व्यवस्था का लाभ उठाना चाहिए।

8-  ड्रिप सिंचाई बनाम स्प्रिंकल सिंचाई  (Drip irrigation vs sprinkler irrigation)

 

1- ड्रिप सिंचाई स्प्रिंकल सिंचाई के मुकाबले ज़्यादा अच्छी और लाभकारी होती है।

2- स्प्रिंकल सिंचाई में पानी की अधिक मात्रा में खपत होती है जिसके कारण पानी ज़्यादा बर्बाद होता है।

3- स्प्रिंकल सिंचाई में पत्तियां और पौधे बहुत ज़्यादा भीग जाते है। जिसके कारण पौधे खराब भी हो जाते है और पत्तियों के खराब होने के कारण बीमारियां फैलने का खतरा होता है।

4- बहुत देखरेख के बाद भी स्प्रिंकल स्प्रे फिक्स खराब हो जाते हैं।

5- ड्रिप इरिगेशन के मुकाबले स्प्रिंकल सिंचाई अधिक खर्चीली अधिक मेहनत से भरी प्रक्रिया मानी जाती है।

इस प्रकार आपको बताया कि ड्रिप सिंचाई क्या होती है और इसको किस प्रकार काम में लिया जाता है और सरकार द्वारा हमें कौन-कौन से फायदे किए जा रहे हैं।हमें आशा है कि आप कोई आर्टिकल बहुत पसंद आया होगा इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए धन्यवाद।

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